आजकल के डिजिटल जमाने में जहां बच्चे दिनभर मोबाइल गेम्स और कार्टून में उलझे रहते हैं, वहां माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि उन्हें अपने धर्म और संस्कारों से कैसे जोड़ा जाए। बचपन की उम्र कच्ची मिट्टी की तरह होती है, आप जैसा आकार देंगे, बच्चे वैसे ही ढल जाएंगे।
अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बच्चा निडर बने और उसमें गजब का आत्मविश्वास आए, तो उसे बचपन से ही श्री हनुमान चालीसा जरूर सिखाएं। लेकिन हम सब जानते हैं कि बच्चों को कुछ भी रटवाना कितना मुश्किल काम है। उन्हें हर चीज खेल-खेल में सिखानी पड़ती है। तो चलिए, आज बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि आप बिना किसी डांट-डपट के अपने बच्चों को बजरंगबली का पाठ कैसे याद करवा सकते हैं।
बच्चों को हनुमान चालीसा सिखाना क्यों जरूरी है?
कई बार लोग सोचते हैं कि इतनी छोटी उम्र में बच्चों को भगवान का पाठ क्यों सिखाया जाए? दरअसल, जब बच्चा चालीसा की चौपाइयां पढ़ता है, तो उसके शब्दों का उच्चारण (Pronunciation) एकदम साफ हो जाता है। इससे उनका दिमाग तेज होता है, याददाश्त बढ़ती है और पढ़ाई में भी उनका फोकस अच्छा हो जाता है।
इसके अलावा, रामायण से मिलने वाली सीख और हनुमान जी की कहानियां बच्चों के अंदर बहादुरी, बड़ों का आदर करना और हर मुश्किल से डटकर लड़ना सिखाती हैं। जब बच्चा ये समझता है कि हनुमान जी कितने ताकतवर थे, तो वह अकेले सोने से या अंधेरे जैसी अनजान चीजों से डरना हमेशा के लिए छोड़ देता है।
बच्चों को चालीसा याद कराने के 5 अचूक और आसान तरीके
बच्चों को कुछ भी सिखाने का सबसे अच्छा तरीका है कि उस चीज को उनके लिए मजेदार बना दिया जाए। आप इन 5 आसान तरीकों को आजमा सकते हैं:
1. म्यूजिक और ऑडियो का इस्तेमाल करें
बच्चों को गाने और कविताएं बहुत जल्दी याद होती हैं। आप रोज सुबह उठते ही या स्कूल जाते समय कार में हनुमान चालीसा का ऑडियो लगा दें। जब बच्चा रोज एक ही धुन (Rhythm) सुनेगा, तो वह खुद-ब-खुद उसे गुनगुनाने लगेगा। आजकल यूट्यूब पर कार्टून वाले एनिमेटेड वीडियो भी मौजूद हैं, जो बच्चों को बहुत पसंद आते हैं।
2. कहानी सुनाकर दिलचस्पी (Interest) बढ़ाएं
बच्चों को कहानियां सुनना बहुत अच्छा लगता है। चालीसा याद कराने से पहले उन्हें हनुमान जी की बहादुरी की मजेदार कहानियां सुनाएं। उन्हें बताएं कि कैसे उन्होंने सूरज को मीठा फल समझकर खा लिया था या कैसे संजीवनी बूटी के लिए पूरा पहाड़ उठा लाए थे। जब बच्चा भगवान को अपना ‘सुपरहीरो’ मान लेगा, तो वह खुद उनके बारे में पढ़ना चाहेगा।
3. रोज सिर्फ 2 लाइनें ही सिखाएं
एक ही दिन में पूरी किताब रटाने की कोशिश बिल्कुल न करें। ऐसा करने से बच्चा बोर हो जाएगा और भागने लगेगा। एक दिन में सिर्फ 2 लाइनें (एक चौपाई) ही सिखाएं। जैसे पहले दिन सिर्फ “जय हनुमान ज्ञान गुन सागर…” सिखाएं। जब वह इसे अच्छे से बोलने लगे, तभी अगली लाइन पर जाएं।
4. पढ़ाई की जगह और वास्तु का ध्यान रखें
बच्चे का मन बहुत चंचल होता है, इसलिए उनका फोकस बढ़ाने के लिए घर का माहौल शांत होना बहुत जरूरी है। अगर आप बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने के वास्तु उपाय अपनाते हैं, तो उन्हें चीजें बहुत जल्दी याद होती हैं। कोशिश करें कि बच्चा जब भी पढ़ने बैठे, तो उसका मुंह पूर्व (East) दिशा की तरफ हो, इससे उनका दिमाग तरोताजा रहता है।
5. आप खुद उनके साथ बैठें
बच्चे वही करते हैं जो वो अपने माता-पिता को करते हुए देखते हैं। अगर आप खुद रोज सुबह-शाम चालीसा का पाठ करेंगे, तो आपका बच्चा भी आपके बगल में बैठकर वही दोहराने की कोशिश करेगा। उनके साथ ताली बजाकर या गाकर पाठ करें, ताकि उन्हें यह कोई ‘स्कूल का होमवर्क’ न लगे।
याद करने पर बच्चों को इनाम (Reward) जरूर दें
बच्चे इनाम के लालच में बड़े-बड़े काम कर जाते हैं! आप उनके साथ एक गेम खेल सकते हैं। उनसे कहें कि “अगर तुमने 5 चौपाइयां बिना अटके सुना दीं, तो मैं तुम्हें तुम्हारा पसंदीदा खिलौना दूंगी या तुम्हारी मनपसंद डिश बनाऊंगी।” इससे उनका उत्साह (Excitement) दोगुना हो जाएगा और वो खुशी-खुशी याद करेंगे।
चलते-चलते
चलते-चलते बस इतना ही कहूंगा कि बच्चों को संस्कार देना एक दिन का काम नहीं है; इसमें थोड़ा समय और बहुत सारा धैर्य (Patience) लगता है। उन पर किसी भी तरह का दबाव न डालें। उन्हें प्यार से, खेल-खेल में और कहानियों के जरिए बजरंगबली के करीब लाएं। एक बार जब चालीसा उनके दिल और दिमाग में बस जाएगी, तो जिंदगी भर कोई भी डर, असफलता या परेशानी उन्हें तोड़ नहीं पाएगी। बस कोशिश करते रहिए, आपको सफलता जरूर मिलेगी!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
किस उम्र से बच्चों को हनुमान चालीसा सिखाना शुरू करना चाहिए?
आप 3 से 4 साल की उम्र से ही बच्चों को चालीसा सुनाना शुरू कर सकते हैं। इस उम्र में वे शब्दों को पकड़ना शुरू करते हैं। 5 से 6 साल की उम्र तक आते-आते वे इसे खुद गुनगुनाने और धीरे-धीरे याद करने के काबिल हो जाते हैं।
अगर बच्चा चालीसा पढ़ने में बोर होता है तो क्या करें?
अगर बच्चा बोर हो रहा है, तो उसे बिल्कुल न डांटें। उसे मोबाइल या टीवी पर हनुमान जी के एनिमेटेड और म्यूजिकल वीडियो दिखाएं। जब बच्चे वीडियो में किसी कार्टून कैरेक्टर को गाते हुए देखते हैं, तो उनका इंटरेस्ट खुद ही बढ़ जाता है।
क्या शाम या रात के समय बच्चों को चालीसा याद करा सकते हैं?
जी हां, बिल्कुल! आप रात को सोने से पहले बच्चों को चालीसा पढ़ा या सुना सकते हैं। इससे उन्हें डरावने सपने नहीं आते, नींद बहुत अच्छी आती है और रात को सोते समय सुनी गई चीजें दिमाग में जल्दी बैठ जाती हैं।
बच्चे को कठिन शब्द कैसे बोलना सिखाएं?
चालीसा में कुछ संस्कृत के शब्द बच्चों के लिए थोड़े मुश्किल हो सकते हैं। उन शब्दों को तोड़-तोड़ कर (जैसे वि-द्या-वान) सिखाएं। जब बच्चा गाकर या धुन के साथ इसे बोलेगा, तो उसकी जीभ अपने आप साफ हो जाएगी।
बच्चों को चालीसा सिखाने का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
इससे बच्चों की याददाश्त (Memory) तेज होती है, उनका मन का डर खत्म होता है और उनके अंदर गजब का आत्मविश्वास आता है। इसके अलावा, बचपन से ही उनमें भगवान के प्रति आदर, अनुशासन और अच्छे संस्कार पैदा होते हैं।