क्या आपके मन में भी अक्सर यह उलझन रहती है कि सूतक काल और पीरियड्स में हनुमान चालीसा पढ़ें या नहीं? हम भारतीय लोग बचपन से ही पूजा-पाठ के कुछ कड़े नियमों को मानते आए हैं। जब भी घर में किसी बच्चे का जन्म होता है, किसी की मृत्यु हो जाती है (सूतक-पातक), या फिर महिलाओं को मासिक धर्म (Periods) आते हैं, तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या हम अपने भगवान को याद कर सकते हैं?
अगर आप अपनी दिनचर्या में श्री हनुमान चालीसा का नियमित रूप से पाठ करते हैं, तो अचानक इसे बीच में छोड़ने से मन में अजीब सी घबराहट और डर लगने लगता है। कई बार लोगों को लगता है कि पाठ बीच में छोड़ने से कहीं भगवान नाराज तो नहीं हो जाएंगे! तो चलिए, आज बिना किसी किताबी या भारी भाषा के, बिल्कुल आम बोलचाल में समझते हैं कि ऐसे मुश्किल समय में पूजा-पाठ को लेकर हमारे शास्त्र असल में क्या कहते हैं।
सूतक काल क्या होता है और इसमें पूजा के नियम क्या हैं?
हमारे हिंदू धर्म में दो तरह के सूतक माने जाते हैं। पहला, जब परिवार में किसी बच्चे का जन्म होता है (इसे सूतक कहते हैं) और दूसरा, जब किसी करीबी की मृत्यु हो जाती है (इसे पातक कहते हैं)। जन्म के समय यह सूतक आमतौर पर 10 से 40 दिन तक चलता है, और मृत्यु के समय 13 दिन तक।
इस दौरान घर के मंदिर में पूजा करना, भगवान की मूर्ति को छूना, या दिया-बाती करना पूरी तरह से मना होता है। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि हम भगवान का नाम ही नहीं ले सकते?
सूतक में हनुमान चालीसा पढ़ने का सही तरीका
जी नहीं, भगवान कभी अपने बच्चों से दूर नहीं होते! सूतक काल में आप मंदिर में जाकर या किताब खोलकर पाठ नहीं कर सकते, लेकिन आप मानसिक जाप (मन ही मन पाठ) जरूर कर सकते हैं। आप कहीं भी बैठे हों, बस आंखें बंद करें और मन ही मन बजरंगबली का ध्यान करते हुए चालीसा की चौपाइयां गुनगुना लें। भगवान के लिए आपकी श्रद्धा मायने रखती है, शारीरिक शुद्धता तो बस एक नियम है।
पीरियड्स (मासिक धर्म) में हनुमान चालीसा पढ़ें या नहीं?
यह हमारे समाज का सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है। कई बार महिलाओं को डरा दिया जाता है कि पीरियड्स के दौरान हनुमान जी का नाम लेने से पाप लगता है क्योंकि वो बाल ब्रह्मचारी हैं। यह बिल्कुल गलत और सुनी-सुनाई बात है!
असल में, पुराने जमाने में महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान आराम देने के लिए पूजा-पाठ और रसोई के कामों से दूर रखा जाता था। इसका भगवान की नाराजगी से कोई लेना-देना नहीं है। अगर हम भगवद गीता के भक्ति योग के सिद्धांतों को गहराई से समझें, तो उसमें साफ लिखा है कि ईश्वर सिर्फ आपकी आत्मा का भाव देखते हैं, आपके शरीर की स्थिति नहीं।
महिलाओं के लिए पीरियड्स के दौरान कुछ खास नियम
अगर आप पीरियड्स के दौरान हनुमान चालीसा पढ़ना चाहती हैं, तो मन में कोई डर न रखें, बस इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें:
- मूर्ति या किताब को न छुएं: मंदिर के अंदर न जाएं और न ही हनुमान जी की मूर्ति या चालीसा की किताब (गुटका) को हाथ लगाएं।
- मन ही मन पढ़ें: आप अपने बिस्तर पर या किसी दूसरे कमरे में आराम से बैठकर मन ही मन पूरी चालीसा का पाठ कर सकती हैं। इसे ‘मानस पूजा’ कहा जाता है, जो सबसे ऊंची मानी जाती है।
- दीपक न जलाएं: इन दिनों में भगवान के सामने दीया या अगरबत्ती खुद न जलाएं, यह काम आप घर के किसी दूसरे सदस्य से करवा सकती हैं।
क्या मोबाइल से हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं?
आजकल हम सब डिजिटल हो गए हैं, तो यह सवाल आना भी लाजिमी है! अगर आपको चालीसा मुंह जुबानी याद नहीं है और आप पीरियड्स या सूतक के दौरान मोबाइल ऐप से देखकर पढ़ना चाहते हैं, तो आप बिल्कुल ऐसा कर सकते हैं।
मोबाइल फोन कोई धार्मिक ग्रंथ नहीं है, इसलिए इसे छूने में कोई मनाही नहीं है। वैदिक ज्योतिष और मंत्र जाप के नियमों के जानकारों का भी यही मानना है कि डिजिटल माध्यम से भगवान का नाम लेना भी उतना ही फलदायी है। बस कोशिश करें कि पढ़ते समय आपका ध्यान पूरी तरह से हनुमान जी के चरणों में हो और मोबाइल के नोटिफिकेशन्स आपको डिस्टर्ब न करें।
चलते-चलते
चलते-चलते बस इतना ही कहूंगा कि भगवान हमारे माता-पिता की तरह हैं। क्या कोई माता-पिता अपने बच्चे के बीमार होने पर या किसी मजबूरी के समय उससे दूर होते हैं? बिल्कुल नहीं! इसलिए, सूतक काल हो या पीरियड्स का समय, आपको डरने या पूजा छोड़ने की कोई जरूरत नहीं है। बस अपनी जगह पर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर बैठ जाएं और सच्चे मन से बजरंगबली को याद करें। वो आपके मन की आवाज जरूर सुनेंगे और आपकी हर परेशानी दूर करेंगे!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या पीरियड्स में मोबाइल से हनुमान चालीसा पढ़ सकते हैं?
जी हां, आप बिल्कुल पढ़ सकती हैं। मोबाइल कोई पवित्र धार्मिक ग्रंथ (किताब) नहीं है। आप साफ जगह पर बैठकर फोन से देखकर चालीसा का मानसिक पाठ कर सकती हैं। बस मंदिर के कमरे में जाने से बचें।
सूतक काल कितने दिन का होता है और पूजा कब शुरू करें?
आमतौर पर मृत्यु के समय सूतक (पातक) 13 दिनों का होता है, जबकि बच्चे के जन्म का सूतक सवा महीने (करीब 40 दिन) तक माना जाता है। इस अवधि के खत्म होने के बाद, घर में गंगाजल छिड़क कर और नहा-धोकर आप दोबारा नियमित रूप से मंदिर की पूजा शुरू कर सकते हैं।
अगर चालीसा याद न हो तो मन ही मन कैसे पाठ करें?
अगर आपको पूरी चालीसा याद नहीं है, तो परेशान न हों। आप सिर्फ “ॐ हं हनुमते नम:” मंत्र का मन ही मन जाप कर सकते हैं, या फिर मोबाइल में हनुमान चालीसा का ऑडियो चलाकर उसे ध्यान से सुन सकते हैं। सुनने से भी उतना ही फायदा मिलता है।
क्या 40 दिन के अनुष्ठान (संकल्प) के बीच पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें?
अगर आपने 40 दिन लगातार हनुमान चालीसा पढ़ने का संकल्प लिया है और बीच में पीरियड्स आ जाएं, तो उन 4-5 दिनों के लिए अपना संकल्प रोक दें (उन्हें गिनें नहीं)। मानसिक जाप जारी रखें और पीरियड्स खत्म होने के बाद नहा-धोकर वहीं से अपनी गिनती दोबारा शुरू कर दें। आपका संकल्प टूटेगा नहीं।
क्या सूतक काल में हनुमान जी को प्रसाद चढ़ा सकते हैं?
नहीं, सूतक काल के दौरान भगवान को स्पर्श करना या उन्हें प्रसाद चढ़ाना वर्जित (मना) होता है। आप केवल मन ही मन उनका ध्यान कर सकते हैं। प्रसाद चढ़ाने और दीया जलाने का काम सूतक खत्म होने के बाद ही किया जाना चाहिए।