बीमारी दूर करने के लिए हनुमान चालीसा का प्रयोग: जानिए सही तरीका और चौपाई

दवा के साथ जब दुआ (प्रार्थना) मिल जाती है, तो असर दोगुना हो जाता है। रोगों से मुक्ति पाने के लिए हनुमान चालीसा से पानी को अभिमंत्रित (Charge) करके पीने का प्राचीन तरीका क्या है, आइए जानते हैं।

Nasai Rog Hare Sab Pira Chaupai for Health and Disease
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क्या आपके घर में भी कोई लंबे समय से बीमार चल रहा है? दवाइयां चल रही हैं, डॉक्टरों के चक्कर कट रहे हैं, फिर भी मरीज को आराम नहीं मिल रहा? जब सेहत साथ छोड़ देती है और मन निराशा से भर जाता है, तब बजरंगबली की शरण ही सबसे बड़ा सहारा बनती है।

अगर आप भी अपने या अपने किसी अपने की खराब सेहत से परेशान हैं, तो श्री हनुमान चालीसा का सही तरीके से प्रयोग आपके लिए एक संजीवनी बूटी साबित हो सकता है। सनातन परंपरा में हनुमान चालीसा को केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि हर तरह के रोग और पीड़ा को मिटाने वाला महामंत्र माना गया है। चलिए, आज बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं कि बीमारी दूर करने के लिए हनुमान चालीसा का प्रयोग कैसे किया जाता है।

बीमारी मिटाने वाली सबसे शक्तिशाली चौपाई

हनुमान चालीसा की हर एक पंक्ति में गजब की शक्ति छिपी है, लेकिन बीमारियों को दूर करने के लिए एक चौपाई सबसे ज्यादा चमत्कारिक मानी जाती है:

“नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥”

इस चौपाई का सीधा सा मतलब है कि जो इंसान लगातार और सच्चे मन से हनुमान जी के नाम का जाप करता है, उसके सारे रोग, कष्ट और शारीरिक-मानसिक पीड़ा जड़ से खत्म हो जाती है। जब इंसान बीमारी के दौर से गुजरता है, तो उसके मन में एक अनजाना सा डर बैठ जाता है। मंत्र जाप और मानसिक शांति की ताकत बताती है कि जब हम इस चौपाई का बार-बार जाप करते हैं, तो हमारे शरीर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) बहने लगती है जो मरीज में बीमारी से लड़ने की गजब की हिम्मत भर देती है।

हनुमान चालीसा से जल अभिमंत्रित करने का प्रयोग (Water Blessing Method)

अगर आपके घर में मरीज बहुत ज्यादा कमजोर है और वह खुद पाठ करने की हालत में नहीं है, तो आप उनके लिए अभिमंत्रित जल (सिद्ध किया हुआ पानी) तैयार कर सकते हैं। यह बहुत ही पुराना और आजमाया हुआ तरीका है:

  • पहला कदम: तांबे या कांच के एक साफ बर्तन में पीने का शुद्ध पानी भरकर रख लें।
  • दूसरा कदम: घर के मंदिर में हनुमान जी की तस्वीर के आगे चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
  • तीसरा कदम: उस पानी के बर्तन को अपने सामने रखें और अपना दाहिना हाथ (Right Hand) उस बर्तन के ऊपर रख लें।
  • चौथा कदम: पूरी श्रद्धा से 7 या 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें, या फिर “नासै रोग हरै सब पीरा…” चौपाई का 108 बार जाप करें।
  • पांचवां कदम: पाठ पूरा होने के बाद पानी में 3 बार फूंक मारें। अब यह जल एक दिव्य औषधि बन चुका है। यह पानी मरीज को दिन में 3 से 4 बार थोड़ा-थोड़ा करके पिलाएं।

हनुमान जी के सिंदूर का चमत्कारी प्रयोग

चालीसा पाठ के साथ-साथ बजरंगबली का सिंदूर भी बीमारियों को दूर भगाने में बहुत मददगार होता है। मंदिर जाकर हनुमान जी के दाएं कंधे या चरणों से थोड़ा सा सिंदूर ले आएं। पाठ करने के बाद उस सिंदूर से मरीज के माथे पर तिलक लगाएं या शरीर के उस हिस्से पर थोड़ा सा लगा दें जहां सबसे ज्यादा दर्द रहता है।

ऐसा माना जाता है कि सिंदूर के इस प्रयोग से मरीज के आस-पास की सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है और उसे मानसिक शांति मिलती है। हनुमान चालीसा के ज्योतिषीय फायदे के अनुसार, सिंदूर लगाने से कुंडली का खराब मंगल और राहु शांत होता है, जिससे बीमारियों में जल्दी आराम मिलने लगता है।

बीमारी दूर करने के लिए प्रयोग करते समय इन बातों का ध्यान रखें

हनुमान जी बहुत ही दयालु हैं, लेकिन उनकी पूजा में कुछ बुनियादी नियमों का पालन जरूर करना चाहिए:

  • दवाइयों के साथ दुआ: सबसे जरूरी बात यह है कि आपको डॉक्टर की दी हुई दवाइयां और डॉक्टरी इलाज कभी बंद नहीं करना है। दवाइयां शरीर का इलाज करती हैं और हनुमान चालीसा आत्मा को ताकत देती है। दोनों मिलकर ही मरीज को जल्दी ठीक करते हैं।
  • साफ-सफाई और सात्विकता: जो व्यक्ति मरीज के लिए पाठ कर रहा है, वह खुद नहा-धोकर साफ कपड़े पहने। घर में मांस-मदिरा (नॉन-वेज और शराब) से पूरी तरह दूर रहें।
  • अटूट विश्वास: मन में किसी भी तरह का शक न रखें। रामायण की कथाओं और शिक्षाओं में भी यही सिखाया गया है कि भक्ति में विश्वास ही सबसे बड़ी कुंजी है। जितने सच्चे मन से आप पुकारेंगे, असर उतना ही जल्दी दिखेगा।

चलते-चलते

चलते-चलते बस इतना ही कहूंगा कि बीमारी और दुख जिंदगी का एक हिस्सा हैं, लेकिन जब संकटमोचन हनुमान जी का हाथ आपके सिर पर होता है, तो बड़े से बड़ा रोग भी टिक नहीं पाता। अगर आपके घर में कोई भी इंसान बीमारी से जूझ रहा है, तो आज ही से हनुमान चालीसा के इस अभिमंत्रित जल वाले प्रयोग को शुरू कर दीजिए। अपनी दवाइयां समय पर लें और पूरे भरोसे के साथ बजरंगबली पर ध्यान लगाएं। बहुत जल्द आपके घर में सेहत और खुशियों का उजाला होगा!


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

बीमारी दूर करने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ कितनी बार करना चाहिए?

रोज़ाना कम से कम 7 या 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। अगर समय कम हो, तो आप “नासै रोग हरै सब पीरा…” चौपाई का 108 बार जाप कर सकते हैं।

अगर मरीज खुद हनुमान चालीसा का पाठ न कर सके तो क्या करें?

अगर मरीज खुद पाठ करने की हालत में नहीं है, तो परिवार का कोई भी सदस्य उनके लिए हनुमान चालीसा का पाठ कर सकता है और जल अभिमंत्रित करके उन्हें पिला सकता है। इसके अलावा मरीज के पास मोबाइल में धीमी आवाज में चालीसा चलाकर भी सुनाई जा सकती है।

क्या अभिमंत्रित जल को कई दिनों तक स्टोर करके रख सकते हैं?

बेहतर यही होता है कि आप रोज़ नया और ताजा पानी अभिमंत्रित करें। सुबह के समय ताजे पानी को पाठ करके सिद्ध कर लें और दिन भर मरीज को थोड़ा-थोड़ा करके पिलाते रहें।

बीमारी दूर करने के लिए पाठ किस समय करना सबसे अच्छा होता है?

सुबह नहाने के बाद ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय पाठ करना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके अलावा शाम के समय (सूरज ढलने के बाद) भी दीया जलाकर पाठ किया जा सकता है।

क्या हनुमान चालीसा का प्रयोग करते समय डॉक्टर की दवाइयां बंद कर देनी चाहिए?

बिल्कुल नहीं! डॉक्टर की दवाइयां और डॉक्टरी इलाज जारी रखना बहुत ज़रूरी है। हनुमान चालीसा का प्रयोग एक आध्यात्मिक उपाय है जो मरीज की इच्छाशक्ति को बढ़ाता है और दवाइयों के असर को तेज करता है।