ज़िंदगी में कई बार ऐसा वक्त आता है जब सब कुछ दांव पर लग जाता है। सारे रास्ते बंद नज़र आते हैं और बहुत कोशिश करने के बाद भी सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है। ऐसे भारी संकट के समय में हर किसी के मुंह से सिर्फ और सिर्फ बजरंगबली का नाम निकलता है।
अगर आप अक्सर या रोज़ाना हनुमान चालीसा का संपूर्ण पाठ पढ़ते हैं, तो आपने इसके आखिर में गोस्वामी तुलसीदास जी की लिखी एक लाइन ज़रूर पढ़ी होगी— “जो शत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥” पर क्या आपने कभी सोचा है कि इस लाइन का असल मतलब क्या है और इसे असल ज़िंदगी में कैसे उतारा जाता है?
आज हम आपको बिल्कुल आम बोलचाल की भाषा में बताएंगे कि हनुमान चालीसा का 100 बार पाठ कैसे करें, इसकी सही विधि क्या है और इसके फायदे क्या-क्या होते हैं। यकीन मानिए, अगर आपने इसे सही तरीके से कर लिया, तो आपकी बड़ी से बड़ी मुराद पूरी हो सकती है!
“जो शत बार पाठ कर कोई” का असली मतलब क्या है?
कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्या सच में इसे 100 बार पढ़ना होता है? इसका सीधा सा जवाब है— हां! जो भी इंसान एक ही जगह पर बैठकर, बिना रुके लगातार 100 बार इस पाठ को पढ़ता है, उसके जीवन की सारी जंजीरें और बंधन टूट जाते हैं।
यह बंधन किसी भयानक बीमारी का हो सकता है, कर्ज़ का हो सकता है, या फिर किसी कोर्ट-कचहरी के चक्कर का। 100 बार पाठ करना सिर्फ एक गिनती पूरी करना नहीं है। यह एक बहुत ही ताकतवर तपस्या है। चूंकि हनुमान जी को शिव का ही अंश माना जाता है, इसलिए उनकी इस तपस्या में भगवान शिव और उनके रहस्य जैसी ही गज़ब की ऊर्जा और असीम शांति छुपी होती है।
हनुमान चालीसा का 100 बार पाठ कैसे करें? (पूरी विधि)
यह कोई रोज़ वाली 2 मिनट की पूजा नहीं है। इसे एक बड़े अनुष्ठान की तरह किया जाता है। इसलिए नीचे दी गई विधि को बहुत ध्यान से समझें और कोई भी गलती करने से बचें:
1. सही दिन और सही आसन का चुनाव
- इस पाठ की शुरुआत किसी भी शुक्ल पक्ष के मंगलवार या शनिवार से करना सबसे अच्छा माना जाता है।
- वक्त हमेशा सुबह का (4 से 6 बजे के बीच) चुनें, क्योंकि इस समय बहुत शांति होती है और दिमाग एकाग्र रहता है।
- ज़मीन पर बैठकर पाठ कभी न करें। लाल रंग के ऊनी या कुशा के आसन का ही इस्तेमाल करें।
- आपका मुंह हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।
2. संकल्प लेना (सबसे ज़रूरी काम)
बिना संकल्प लिए 100 पाठ का कोई खास फायदा नहीं मिलता। पाठ शुरू करने से पहले सीधे हाथ में थोड़ा सा साफ पानी, लाल फूल और साबुत चावल लें। अपना नाम, अपने गोत्र का नाम और अपनी मन्नत (जो भी आप चाहते हैं) मन ही मन बोलें, और फिर उस पानी को ज़मीन पर छोड़ दें। इसके बाद सबसे पहले भगवान श्री राम का ध्यान ज़रूर करें, क्योंकि राम जी के बिना हनुमान जी कोई पूजा स्वीकार नहीं करते।
3. अखंड दीया और गिनती कैसे याद रखें?
हनुमान जी के चित्र या मूर्ति के सामने चमेली के तेल या शुद्ध देसी घी का एक बड़ा दीया जलाएं। दीया इतना बड़ा होना चाहिए कि पाठ खत्म होने (करीब 4 से 5 घंटे) तक यह लगातार जलता रहे। बार-बार दीये में तेल डालना पड़े, ऐसा नहीं होना चाहिए।
अब बात आती है कि 100 की गिनती कैसे याद रखें? इसके लिए आप 108 दानों वाली रुद्राक्ष की माला या 100 छोटे लाल मोतियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। हर बार एक पाठ पूरा होने पर एक दाना खिसका लें। इससे आपका सारा ध्यान सिर्फ पढ़ने पर रहेगा, गिनती भूलने का डर आपको परेशान नहीं करेगा।
शत बार पाठ के दौरान किन नियमों का पालन करें?
यह एक बहुत ही कड़ा अनुष्ठान है, इसलिए आपको कुछ खास बातों का सख्ती से पालन करना होगा:
- चुप रहना (मौन): एक बार संकल्प लेकर पाठ शुरू कर दिया, तो बीच में किसी से कोई बात नहीं करनी है। अपने फोन को साइलेंट करके दूसरे कमरे में रख दें।
- ब्रह्मचर्य: अनुष्ठान वाले दिन और उससे एक दिन पहले शारीरिक और मानसिक रूप से ब्रह्मचर्य का पूरा पालन करें।
- सात्विक खाना: उस दिन एकदम सादा और सात्विक खाना ही खाएं। लहसुन, प्याज या किसी भी तरह के नशे से बहुत दूर रहें।
ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का भी मानना है कि इस तरह की कठोर साधना करने से आपकी कुंडली में मौजूद मंगल ग्रह की शांति और उसके उपायों का असर खुद-ब-खुद होने लगता है, जिससे ज़िंदगी की अड़चनें और गुस्सा दोनों खत्म होने लगते हैं।
100 बार पाठ करने के हैरान करने वाले फायदे
जब आप पूरी श्रद्धा के साथ इस पाठ को पूरा कर लेते हैं, तो इसके जो फायदे देखने को मिलते हैं, वे सच में हैरान कर देने वाले होते हैं:
- हर तरह के डर से छुटकारा: आपके अंदर का सारा अनजाना डर और घबराहट जड़ से खत्म हो जाती है।
- बुरी नज़र से बचाव: जिस घर में यह पूजा होती है, वहां कोई भी बुरी ताकत या नकारात्मक ऊर्जा टिक ही नहीं सकती।
- अटके हुए काम बन जाना: चाहे कर्ज़ की परेशानी हो या नौकरी की दिक्कत, इस पाठ के असर से सारे बंद दरवाज़े अपने आप खुलने लगते हैं।
- गज़ब का कॉन्फिडेंस: आपके अंदर एक ऐसी हिम्मत और ऊर्जा आ जाती है कि आप बड़े से बड़ा फैसला बिना डरे ले पाते हैं।
चलते-चलते
बजरंगबली को खुश करना बहुत आसान भी है और अगर आपके नियम सही न हों, तो बहुत मुश्किल भी। वे अपने भक्तों से बस सच्चा प्यार और पूरा भरोसा मांगते हैं। 100 बार हनुमान चालीसा का पाठ करना कोई छोटी-मोटी बात नहीं है; यह आपके सब्र और भरोसे का एक बड़ा इम्तिहान है। जब आप अपनी सारी चिंताएं छोड़कर, बजरंगबली के चरणों में पूरी तरह डूबकर यह पाठ करेंगे, तो यकीन मानिए, वे आपकी झोली खुशियों से ज़रूर भर देंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. हनुमान चालीसा का 100 बार पाठ करने में कितना समय लगता है?
एक बार हनुमान चालीसा पढ़ने में लगभग 2.5 से 3 मिनट का समय लगता है। अगर आप लगातार पढ़ते हैं, तो 100 पाठ पूरे करने में बिना रुके लगभग 4 से 5 घंटे का समय लग जाता है। शुरू में आपको थोड़ा ज़्यादा समय लग सकता है, पर रोज़ पढ़ने वालों के लिए यह समय काफी कम हो जाता है।
2. क्या पाठ के दौरान बीच में वॉशरूम या पानी पीने के लिए उठ सकते हैं?
अगर आपने एक ही बार में 100 पाठ पूरे करने का संकल्प लिया है, तो बीच में उठना सही नहीं माना जाता। इसलिए पाठ शुरू करने से पहले ही पूरी तरह फ्रेश हो लें। बहुत ज़्यादा इमरजेंसी होने पर ही अपनी जगह से उठें, लेकिन वापस आकर अच्छे से हाथ-मुंह धोकर ही दोबारा पाठ शुरू करें।
3. क्या महिलाएं भी 100 बार हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं?
जी हां, बिल्कुल! महिलाएं भी पूरी श्रद्धा के साथ यह महापाठ कर सकती हैं। बस इस बात का ध्यान रखें कि पीरियड्स के दिनों में यह पाठ न करें। इसके अलावा, महिलाओं को हनुमान जी की मूर्ति को सीधे छूने से बचना चाहिए; आप दूर से ही अपनी मन्नत मांगते हुए पूजा कर सकती हैं।
4. क्या इस पूजा को कई दिनों में बांटकर किया जा सकता है?
हां, अगर आपके पास एक साथ 4-5 घंटे बैठने का समय नहीं है या सेहत साथ नहीं देती, तो आप 11 दिन, 21 दिन या 41 दिन का संकल्प ले सकते हैं। जैसे कि रोज़ाना एक निश्चित संख्या (जैसे 10 पाठ) में इसे पूरा करना भी बहुत चमत्कारिक फायदे देता है। बस ध्यान रहे कि रोज़ पढ़ने का समय और जगह एक ही होनी चाहिए।
5. अगर पाठ करते समय गिनती भूल जाएं तो क्या करना चाहिए?
गिनती भूलना बहुत आम बात है। इसीलिए शुरुआत से ही 108 दानों वाली रुद्राक्ष की माला या 100 छोटे लाल मोतियों का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर फिर भी भूल जाएं, तो अंदाज़े से 2-4 पाठ ज़्यादा पढ़ लें। कम पढ़ने से संकल्प अधूरा रह सकता है, पर ज़्यादा पढ़ने का कोई नुकसान नहीं होता।