हनुमान चालीसा में किन-किन देवी-देवताओं का जिक्र है? (चौपाई सहित पूरी लिस्ट)

हनुमान चालीसा मात्र हनुमान जी की स्तुति नहीं है; इसमें पूरे ब्रह्मांड के देवताओं का सम्मान छिपा है। आइए चौपाइयों में छिपे उन सभी देवी-देवताओं और दिग्पालों के नामों को खोजते हैं।

Gods and Deities Mentioned in Hanuman Chalisa Chaupai
Share this article

हम में से लगभग हर इंसान रोज़ सुबह-शाम हनुमान चालीसा गुनगुनाता है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान से चालीसा की पंक्तियों को पढ़ा है? गोस्वामी तुलसीदास जी ने 40 चौपाइयों में सिर्फ हनुमान जी की वीरता का गुणगान ही नहीं किया, बल्कि इसमें कई प्रमुख देवी-देवताओं, ऋषियों और दिगपालों का नाम भी बहुत खूबसूरती से पिरोया है।

अगर आप रोज़ श्री हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, तो आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसका पाठ करने से सिर्फ बजरंगबली ही नहीं, बल्कि कई देवी-देवताओं का आशीर्वाद एक साथ मिल जाता है। चलिए, आज बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि हनुमान चालीसा में किन-किन देवी-देवताओं और दिव्य हस्तियों का जिक्र आया है और किस चौपाई में उनका नाम छुपा है।

हनुमान चालीसा में आए प्रमुख भगवान (त्रिदेव और प्रमुख देव)

हनुमान चालीसा में सनातन धर्म के प्रमुख देवताओं का वर्णन बहुत ही आदर के साथ किया गया है:

1. भगवान श्री राम (Lord Ram)

हनुमान जी के प्राणों में श्री राम बसते हैं, इसलिए चालीसा में सबसे ज्यादा जिक्र भगवान राम का ही आया है। “राम दूत अतुलित बल धामा”, “राम काज करिबे को आतुर”, और “राम दुआरे तुम रखवारे” जैसी कई पंक्तियों में प्रभु राम का नाम आया है।

2. भगवान शिव / शंकर (Lord Shiva)

हनुमान जी को भगवान शिव का ही रुद्र अवतार माना जाता है। चालीसा की चौपाई “संकर सुवन केसरी नंदन” में ‘संकर’ शब्द भगवान शिव के लिए ही आया है। यानी वे शिव जी के ही रूप और पुत्र माने गए हैं।

3. भगवान विष्णु / श्रीपति (Lord Vishnu)

चौपाई “सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं॥” में ‘श्रीपति’ शब्द भगवान विष्णु के लिए आया है। माता लक्ष्मी के पति होने के कारण विष्णु जी को श्रीपति कहा जाता है। जब हनुमान जी लंका से लौटे थे, तो प्रभु राम (विष्णु रूप) ने उन्हें गले से लगा लिया था।

4. ब्रह्मा जी (Lord Brahma)

सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी का नाम भी चालीसा में मिलता है। चौपाई “सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥” में ‘ब्रह्मादि’ का मतलब है ब्रह्मा जी और अन्य बड़े-बड़े मुनि जो हनुमान जी के गुणों का गान करते हैं।

5. सूर्य देव (Sun God / Bhanu)

सूर्य देव हनुमान जी के गुरु हैं। चालीसा की प्रसिद्ध पंक्ति “जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताही मधुर फल जानू॥” में ‘भानू’ शब्द सूर्य देव के लिए आया है, जिन्हें बालपन में हनुमान जी ने एक मीठा फल समझकर निगल लिया था।

6. पवन देव / वायु देव (Wind God)

पवन देव को हनुमान जी का मानस पिता माना जाता है। चालीसा के दोहे में “पवन तनय संकट हरन…” और चौपाई में “अंजनि पुत्र पवनसुत नामा” के रूप में पवन देव का स्मरण किया गया है।

हनुमान चालीसा में आई प्रमुख देवियां

हनुमान चालीसा में केवल पुरुष देवताओं का ही नहीं, बल्कि प्रमुख देवियों का नाम भी बड़े आदर से लिया गया है:

1. माता सीता / जानकी (Mata Sita)

माता सीता हनुमान जी की आराध्य देवी और मां के समान हैं। चौपाई “अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥” में ‘जानकी माता’ का जिक्र है। माता सीता ने ही हनुमान जी को आठों सिद्धियां और नौ निधियां बांटने का वरदान दिया था।

2. माता सरस्वती / सारद (Goddess Saraswati)

ज्ञान की देवी मां सरस्वती का नाम भी चालीसा में आया है। चौपाई “नारद सारद सहित अहीसा” में ‘सारद’ शब्द माता सरस्वती के लिए इस्तेमाल हुआ है, जो हनुमान जी की महिमा का गुणगान करती हैं।

3. माता अंजनी (Mata Anjani)

हनुमान जी को जन्म देने वाली उनकी माता अंजनी का नाम चालीसा में दो जगह आता है— “अंजनि पुत्र पवनसुत नामा” और “केसरी नंदन” के रूप में।

हनुमान चालीसा में आए अन्य देवपुत्र, दिकपाल और ऋषिगण

देवी-देवताओं के अलावा चालीसा में कई अन्य महान पौराणिक पात्रों का भी नाम पिरोया गया है:

  • लक्ष्मण जी (Laxman Ji): “लाय सजीवन लखन जियाये” पंक्ति में लक्ष्मण जी का नाम आया है, जिनकी जान हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाकर बचाई थी।
  • भरत जी (Bharat Ji): “तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई” में श्री राम हनुमान जी से कहते हैं कि तुम मुझे मेरे भाई भरत के समान ही प्रिय हो।
  • यमराज (Yamraj) और कुबेर जी (Kuber): चौपाई “जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते॥” में ‘जम’ शब्द यमराज (मृत्यु के देवता) और ‘कुबेर’ (धन के देवता) के लिए आया है।
  • दिगपाल (Digpalas): आठों दिशाओं के रक्षक देवताओं (जैसे इंद्र, वरुण, अग्नि आदि) को ‘दिगपाल’ कहा गया है। मंत्र जाप और स्तुति का महत्व बताते हुए यह कहा गया है कि ये सभी दिगपाल भी हनुमान जी की प्रशंसा करते हैं।
  • देवऋषि नारद, सनकादि और शेषनाग: चौपाई “सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥” में देवऋषि नारद, ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनकादि ऋषि और ‘अहीसा’ यानी हजार फनों वाले शेषनाग जी का वर्णन है। रामायण की कथाओं और पात्रों के अनुसार ये सभी दिव्य आत्माएं हनुमान जी के गुण गाती हैं।

एक चालीसा पढ़ने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद कैसे मिलता है?

सनातन धर्म में माना जाता है कि हनुमान जी कलयुग के जागृत देवता हैं। जब आप हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, तो उसमें श्री राम, शिव जी, विष्णु जी, ब्रह्मा जी, माता सीता, सरस्वती जी और सूर्य देव समेत सभी दसों दिगपालों का नाम अपने आप आ जाता है।

यही वजह है कि हनुमान जी की पूजा के ज्योतिषीय फायदे में कहा गया है कि सिर्फ एक हनुमान चालीसा पढ़ने से आपकी कुंडली के सभी 9 ग्रह शांत हो जाते हैं और आपको सभी देवी-देवताओं की कृपा एक साथ मिल जाती है।

चलते-चलते

चलते-चलते बस इतना ही कहूंगा कि हनुमान चालीसा सिर्फ 40 पंक्तियों की किताब नहीं है, बल्कि यह सनातन धर्म का एक महामंत्र है। इसमें त्रिदेवों से लेकर नौ ग्रहों और दिशाओं के रक्षकों तक का नाम पिरोया गया है। जब भी आप अगली बार पाठ करने बैठें, तो इन सभी देवी-देवताओं का ध्यान मन में जरूर करें। इससे आपका पाठ और भी ज्यादा फलदायी हो जाएगा। जय श्री राम, जय बजरंगबली!

हनुमान चालीसा में कुल कितने देवी-देवताओं का नाम आता है?

हनुमान चालीसा में मुख्य रूप से भगवान श्री राम, शिव जी, विष्णु जी (श्रीपति), ब्रह्मा जी, सूर्य देव, पवन देव, यमराज, कुबेर जी, माता सीता, माता सरस्वती (सारद), माता अंजनी, लक्ष्मण जी, भरत जी और दिकपालों समेत 15 से अधिक देवी-देवताओं व दिव्य हस्तियों का जिक्र आया है।

क्या हनुमान चालीसा पढ़ने से सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है?

जी हां, बिल्कुल! क्योंकि हनुमान चालीसा में त्रिदेवों, दिकपालों और मुख्य देवियों के नाम शामिल हैं, इसलिए इसका पाठ करने से आपको एक साथ सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।

हनुमान चालीसा में माता सीता को किस नाम से पुकारा गया है?

हनुमान चालीसा की प्रसिद्ध चौपाई “अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥” में माता सीता को ‘जानकी माता’ नाम से संबोधित किया गया है।

‘जम कुबेर दिगपाल जहां ते’ चौपाई का क्या मतलब है?

इस चौपाई का अर्थ है कि यमराज (जम), धन के देवता कुबेर और दसों दिशाओं के रक्षक (दिगपाल) भी हनुमान जी के यश और महिमा का पूरा वर्णन करने में असमर्थ हैं।

हनुमान चालीसा में सूर्य देव का जिक्र किस चौपाई में आया है?

हनुमान चालीसा में सूर्य देव का जिक्र “जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताही मधुर फल जानू॥” चौपाई में आया है, जहां ‘भानू’ शब्द सूर्य देव के लिए इस्तेमाल किया गया है।